उपवास का धार्मिक, आध्यात्मिक और वैदिक महत्व तीनों ही है। उपवास वासना से निवृति का अकाट्य साधन है। इन्द्रियों व मन पर विजय पाने के लिए जिताहार होनेकी आवश्यकता होती है। चूंकि अन्न में मादकता होती हैं। इसमें एक प्रकार का नशा होता है। जिससे भोजन के पश्चात, हम प्रायः आलस्य अनुभव करते हैं। पके हुए अन्न के नशे में एक प्रकार की पार्थिव तामस शक्ति होती है जो पार्थिव शरीर का संयोग पाकर दुगनी हो जाती हैं।
उपवास से न केवल शारीरिक विकृति दूर होती है वरन मन और आत्मा भी शुद्ध होती हैं।
कुछ लोग उपवास को नकारते हैं लेकिन उपवास भूख लगने पर समाप्त होने का नाम हैं। उपवास से मन प्रार्थना की और तीव्रता से जाता है अर्थात उपवास से मन ईश्वर की ओर होता है। लेकिन उपवास का शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए उसकी कला का ज्ञान भी आवश्यक है।
आपने स्वयं अनुभव किया होगा ज्वर होने पर डॉक्टर, वैद्य भोजन का निषेध कर देते है. पशु-पंक्षी रोगी होने पर स्वयं ही आहार बंद कर देते हैं और एक ओर विश्राम की मुद्रा में पड़े रहते है। इस प्रकार हमे पता चलता है कि उपवास में रोगरोधक शक्ति है। उपवास का नियम पालन हो तभी उसका अनुकूल परिणाम मिलता है लेकिन प्रतिकूल स्थिति में इससे शरीर को कष्ट हो जाता है. ऐसा देखने में आया है कि अल्पाहार करने से दुर्बलता आती है जबकि उपवास से नहीं।
धार्मिक दृष्टि से उपवास में भी अलग-अलग खान-पान का महत्व है. किसी में फलाहार है तो किसी में पानी तक मना है. किसी में केवल मिष्ठान खाया जाता है तो किसी में खट्टा का निषेध किया जाता है. वास्तव में यह सब नियम प्रकृति के संतुलन के लिए बनाए गये है. आयुर्विज्ञान में इसको वैज्ञानिक स्तर पर विभाजित किया गया हैं.
यह उपवास निम्न प्रकार से है –
प्रातःकालीन
सायंकालीन
रसोपवास
एकाहारोपवास
फलोपवास
दुग्धोपवास
मठोपवास
पूर्णोपवास
साप्ताहिक उपवास
लघु उपवास
कड़ा उपवास
दूर उपवास
व्यायाम उपवास
वास्तव में उपवास शरीर शुद्धि का एक सशक्त माध्यम है। स्वास्थ्य एवं धर्म दोनों ही दृष्टि से उपवास का एक विशेष महत्व है। शरीर को साधना अनुकूल स्वस्थ रखना भी धर्म है।
उपवास रखने के लाभ
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो उपवास करने के कई स्वास्थ लाभ है-
उपवास से एकाग्रता बढती है और किसी कार्य को एकाग्र होकर करने की शक्ति भी बढ़ती है.
उपवास शरीर को निरोग बनाता हैं।
उपवास के दौरान जो भी भोजन बचता है उसे किसी सतपात्र व्यक्ति को दान में दे। इससे आप सुख की अनुभूति करेंगे और यह एक पुण्य का कार्य है।
उपवास से शरीर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता हैं जो हमारे कार्यो को सफ़ल बनाने में मदत करता है।
सावधानिया
यदि आप बीमार या कमजोर है तो उपवास न करें. ऐसी स्तिथि में वैद्य व डॉक्टर की सलाह से ही उपवास रखे।
शारीरिक रूप से कमजोर होने पर या चक्कर आने पर उपवास न रखे।

