भारत वर्ष संतों की भूमि है | नजाने कितने अपने जीवन ज्योति को जलाकर भावी पीढ़ी के ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग प्रसस्त कर गये हैं | इन में से यह एक प्रसिद्द पंक्ति है की -
“अभी, यहाँ, इसी वक्त जो सुखी नहीं है वो कहीं जाकर, कुछ पा कर, कुछ बन कर सुखी नहीं हो सकता |”
यह बात कुछ समझ नहीं आता | क्यूँ की अपने सारे जीवन करने, पाने, लेने,देने में ही बिता रहे हैं इसलिए ये बात समझ में नहीं आता | हम सोचते हैं की कुछ करने से सुख मिलेगा | तो करने वालों को देखो क्या वो सुखी हैं ? कर कर के मर रहे हैं | तो क्या करें , कुछ न करें ? नहीं नहीं होनें दें | जैसे एक बालक के अनायास प्रयास होते हैं | भूख लगी है तो स्वास्थ्य अनुकूल खा लें , नींद आये तो सो ले | परन्तु अगर हम ऐसा चाहिए वेसा चाहिए में लगे रहेंगे तो सुख दुःख में उलझे रहेंगे सहज जीवन की अनुभूति से बंचित रह जायेंगे |
बस हर काम में अन्दर से सहज रहने की कोशिश करे फिर प्रत्येक काम में आनंद आने लगेगा! ध्यान का अभ्यास इसके लिए अच्छा उपाए है, जब भी समय मिले कुछ देर के लिए आँखे बंद कर आराम से बिना कोई कल्पना किये ध्यान में बैठ जाए !
भीतर से ठहर जाना ही सहजता है, बाहर भले पूरी तरह व्यस्त हो लेकिन अन्दर से शांत रहे, जब भीतर से शांत होंगे तो मुश्किल से मुश्किल काम भी आसानी से कर सकते है लेकिन यदि अन्दर से अशांत है तो आसान काम में भी मुश्किल खड़ी कर देते है !
तो सहज जीवन कैसे जिए - हाँ ये तो काम की बात है | इसके लिए सबसे आसान तरीका ये है | जैसा बनना चाहते हैं उसका संग करें, संग से ही रंग लायेगा | सौभाग्य है की हमारे देश में ऐसे जीवन की एक बहुत बड़ी श्रुंखला है | भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर आदि आदि | चलो … आप सोचेंगे की हम इतने बड़े हो नहीं सकते हैं, तो फिर अभी के हि देख लेते हैं | रामकृष्ण, विवेकानन्द, कवीर, मीरा, ज्ञानेश्वर, नामदेव, रमण महर्षि और भी कितने नाम लें | इन के राह पर चलने वाले कई प्रसिद्द, अप्रसिद्ध जीवन अब भी जी रहे हैं | सहज जीवन की झलक तो उनके जीवन में मिलेगा ही मिलेगा | अगर इन के जीवन में दोष दिख रहा है तो समझ लो हमारे दुःख के दीन अब गये नहीं | सहज जीवन के तो बात क्या क्या करें ?
सहज हमारी स्वाभाविक अवस्था है ! लेकिन हम दिनभर अनेक ऐसी बेकार की बातों में उलझे रहते है जिनका हमारी ज़िन्दगी में कोई मतलब नहीं |
उदहारण - उसका क्या हुआ , इसका क्या हुआ, नफा, नुकसान, दुनिया दारी के सुचना इकठ्ठा करते करते थक जाते हैं फुर्सत नहीं मिलती, तो सहजता कैसे मिलेगा ? तो फिर आप बोलोगे की स्मार्ट कैसे रहें, अपडेट कैसे रहें | हाँ - यही तो बात है , अब तो बताओ इसे आप को मिलता क्या है ? सुख ? कभी नहीं - आप को तो ये डायबेटिक्स, हाई बिपि, लो बिपि टेंशन और भी नजाने क्या क्या दे जाते हैं | और अंत में तो पूछो ही मत सब छोड़ कर जय राम जी की सब स्वाहा | कहाँ से आया था कहाँ गया कोई पता नहीं |
यदि सहजता जीवन में उतर जाए तो मन शांत रहेगा और हम जीवन को जी पायेंगे अन्यथा हम जीवन काटते है जीते नहीं !

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