अपने रक्षक आप (part1)
(बापूजी के दुर्लभ सत्संग में से एक)
NOTES
राम हनुमान जी का पत्थर तारने का प्रसंग
राम न सके राम गुन गाही...
राम भगत जगत जन चार प्रकार सुकृतिनो अनघ उदार
इंद्रिय को स्वभाव नीचे गिरना
स्त्री आकर्षण प्रसंग हाथी, प्रसंग
गिदूमल जज प्रसंग
पाप आंख से घुसती है
धर्म को धंधा न बनाएं
अपना मान नहीं ईश्वर और गुरु का मान है
पादरी और मैनेजर और फिल्म प्रसंग
गुरु के हृदय से हटा दिया और क्या सजा दें
स्त्री और पुरुष प्रसंग
साधन करे और गलती न करे तो उत्थान
माली और बगीचा प्रसंग
सच्चा मित्र वही जो मित्र की गलती को सामने से कह दे
अपने आप की कर्म करो गुरु ईश्वर अपने कर्म आप करेंगे
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पाप पहले आँख से घुसता है फ़िर वाणी से पुष्ट होता हैं, और बार देखने-बोलने से और बढ़ता जाता हैं।
धर्म और ईश्वर के आड़ में धंधा करने वाले खुद बदनाम होते है और संस्था भी, ऐसे लोग ईश्वर के साथ धोखा होता है।
पादरी के फिल्म देखने की गुजारिश पर डाइरेक्टर का मना करना, थियेटर में एक ही दरवाज़ा है, दुनिया की नज़र से बच जाते लेकिन ईश्वर की नज़र से नहीं।
जिसके आचरण से गुरु को दुख हुआ वो गुरु के ह्रदय से निकल जाता है, उसके लिए यही सजा हो जाती हैं।
स्त्री की ओर एक बार क्षमा, दूसरी बार देखा तो अपराध और तीसरी बार देखा तो सजा है।
एक बार देखने से क्या बिगड़ता है, उनका बिगड़ता ऐसा है कि सुधारने वाले थक जाते है।
साधन थोड़ा ही करें और गलती ना करें तो भी बच जाते हैं, साधन भी खूब करें और गलतिया भी नहीं छोड़े उनके जीवन में उन्नति नहीं।
कितना भी शरीर को खिलाये लेकिन आकर्षण नहीं छोड़ा तो शरीर कमजोर होगा।
जितना साधना ऊँची होती हैं उतना गिरने का ख़तरा ज्यादा होता हैं, लापरवाही नहीं करें।
एक दूसरे की गलती को पोषण मत करो उन्हे बचाओ गिरने से, तो ही सच्चे हितैषी हैं।
जितना चरित्र गिरने से खतरा होता है उतना स्वस्थ्य, धन गिरने से भी नही होगा।
हमें जो करना चाहिए वो कर डाले, परमात्मा को जो करना है वो कर देता है।
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