शनिवार, 20 मई 2023

अकेलापन और एकांत


*'अकेलापन'* इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है.!

और *'एकांत'*

इस संसार में सबसे बड़ा वरदान.!!

ये दो समानार्थी दिखने वाले

शब्दों के अर्थ में

. आकाश पाताल का अंतर है।

*अकेलेपन* में छटपटाहट है

तो *एकांत* में आराम है।

*अकेलेपन* में घबराहट है

तो *एकांत* में शांति।

जब तक हमारी नज़र

बाहरकी ओर है तब तक हम.

*अकेलापन* महसूस करते हैं

और

जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी

तो *एकांत* अनुभव होने लगता है।

ये जीवन और कुछ नहीं

वस्तुतः

*अकेलेपन* से *एकांत* की ओर

एक यात्रा ही है.!!

ऐसी *यात्रा* जिसमें

*रास्ता* भी हम हैं, *राही* भी हम हैं

और *मंज़िल* भी हम ही हैं.!!

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